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डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"


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हादसों के इस शहर में घर तुम्हारा दोस्तों।

Posted On: 22 Oct, 2011  
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क्या हुआ है मुझे आजकल ये, क्यूँ जमीं पर उतरता नहीं हूँ

Posted On: 18 Oct, 2011  
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के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

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के द्वारा: डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज" डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: अजय यादव अजय यादव

आदरणीय डॉ.साहब ,.सादर अभिवादन आपकी रचनाएं हमेशा बेहतरीन होती हैं ,.... मूरख क्या तारीफ करेगा ,...हर शेर कुछ कहता हुआ ,.बहुत बहुत बधाई ,...आपकी उस्तादी को नमन करते हुए एक प्रयास करता हूँ ,... मार्गदर्शन का प्रार्थी हूँ बेपरवाह हुए जो मंजिल-ए-जिंदगी से परवरदिगार मंजिल देता जरूर है जो ढूँढते है हर चेहरे में राम को खुदा उनके करीब होता जरूर है ग़मों की बरसात में पी नाम का प्याला खुशिओं का उनको देखो चढ़ता सुरूर है कायनात के मालिक का हाथ जिनके सिर हो परखो जरा संभल के नहीं होता गुरूर है बिखर के जुड जाए तो करिश्मा ही होगा मालिक से किया वादा ,निभाना जरूर है टूटेगी मजबूरी छाएगी रौनक नजर-ए-इनायत उसकी नहीं अब दूर है !........सादर आभार सहित हार्दिक अभिनन्दन

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

के द्वारा: डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज" डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

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के द्वारा: Acharya Vijay Gunjan Acharya Vijay Gunjan

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के द्वारा: ashishgonda ashishgonda

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के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

के द्वारा: डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज" डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

आपकी रचना से प्रेरणा लेकर कुछ लिखने का प्रयास किया है, कृपया आशीर्वाद दें- हम ही जिम्मेदार हैं जो ये हालत हो रही, आज मेरे देश की जो ये दुर्गत हो रही। अपराधियों को वोट दें फिर दोष दें नेताओं को, वोटरों की ये पुरानी मित्र आदत हो रही। संत  था वह इसलिये मारा गया आतंक से, डाकुओं की सच कहा कितनी हिफाजत हो रही। धर्म का चोला पहनकर और ईश्वर नाम से, देखियेगा देश में कितनी तिजारत हो रही। इंसाफ के मंदिर बने नेताओं की कठपुतलियाँ, कैद में संसद के शायद अब अदालत हो रही। कुर्सियां खाली करो अब आ रही जनता यहाँ, संसद को क्या मालुम नहीं बाहर बगावत हो रही। हर तरफ तो लूट भ्रष्टाचार औ आतंक है, दूसरी अब क्रांति की शायद जरुरत हो रही। आपकी बातों को मेरी पूर्णतः है सहमति, बदनाम सुरज जी यहाँ सचमुच सियासत हो रही।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

आदरणीय डाक्टर साहिबान ..... सादर प्रणाम ! ये ढोंगी हैं, नहीं कोई है इनका धर्म मज़हब, दिखावे के लिए सारी इबादत5 हो रही है॥ आप शायद भूल गए लगते है की हमारा देश धर्म निरपेक्ष है और यहाँ पर साप्रदायिक सदभावना वाली सियासत होती है – इसलिए इबादत में खोट तो दिखाई देगा ही देगा सरस्वती माता जी के पूजन की हार्दिक मुबारकबाद हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा: डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज" डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"