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आ जाओ फिर से लौट के इक शाम के लिए

Posted On: 7 Aug, 2015 कविता में

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दिल के सुकून चैन ओ आराम के लिए
आ जाओ फिर से लौट के इक शाम के लिए

अब तो तिरे ख़याल में रहता हूँ रात दिन
मिलता कहाँ है वक़्त किसी काम के लिए

इस मैकशी नज़र से मिलाकर नज़र कहूँ
दिल जान जिगर ले लो बस इक जाम के लिए

रावन के भी बहुत से तरफ़दार हो गए
मुश्किल हुई है राह भी अब राम के लिए

तुमपे भला लगाऊँ क्यूँ इल्ज़ाम क़त्ल का
तुम तो महज़ बहाना थे इस काम के लिए

‘सूरज’ गवां दी तूने तो गफलत में ज़िंदगी
बख़्शी थी जो ख़ुदा ने किसी काम लिए

डॉ सूर्या बाली ‘सूरज’

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1 प्रतिक्रिया

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Bobbe के द्वारा
July 11, 2016

This ring on a wo812&#mna7;s finger is a sign of her acceptance and willingness to marry a specific particular person. Usually are offered by guys to women. Even so, the other way about also is gaining popularity within the US. In some countries like Finland, Norway and so forth both parties committed to marriage put on these rings.


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