दिल की बातें दिल से

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जान ले लेता है ये पलकें झुकाना आपका

Posted On 1 May, 2012 में

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इस क़दर अच्छा नहीं मुझको सताना आपका॥

जान ले लेता है ये पलकें झुकाना आपका॥

आपके आने से हो जाती है ए महफिल जवां,

तोड़ देता दिल सभी का दूर जाना आपका॥

ज़िंदगी भर के लिए एहसान मुझ पे कर गया,

कल दुपट्टे में छुपा के जाम लाना आपका॥

मेरा क्या मैं तो यहाँ पे हूँ मुसाफिर की तरह,

सारी महफिल आपकी सारा ज़माना आपका॥

आशिक़ों की जान का दुश्मन बना है आजकल,

बन संवर के यूं गली में आना जाना आपका॥

जान ले लेती हैं ये क़ातिल निगाहें आपकी,

दिल को बिस्मिल कर दिया हैं मुस्कुराना आपका॥

दिल के दरवाजे खुले है शौक़ से आ जाइए,

हो गया है दिल मेरा अब तो ठिकाना आपका॥

आपका क्या जाएगा बस इक नज़र तो देख लो,

ज़िंदगी पा जाएगा फिर से दिवाना आपका॥

आज फिर बरसात का “सूरज” ये मौसम आ गया,

मार न डाले कहीं ये भीग जाना आपका॥

डॉ. सूर्या बाली “सूरज”

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63 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Spike के द्वारा
July 11, 2016

Sarah has grown up beautifully! What wonderful photos you have taken of her. Glad Snowy is doing well, and praying he will continue to do so. Take it easy, Scott and I can both relate to back issues. Can’t wait to visit and see you next month…the countdown has begun (well, it actually began the moment I hit &##220;purchase&88221; on the plane tickets).

gopalkdas के द्वारा
May 12, 2012

वाह वाह वाह मज़ा आ गया इस ग़ज़ल को पढ़ कर बेहतरीन ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकारें..

    May 16, 2012

    गोपाल जी ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है । आपकी तारीफ के लिए शुक्रिया !

Vinod K Shukla के द्वारा
May 10, 2012

Baali ji Namaskar. Aapki gazal bahut hi pyari hai. Is there any book written by you please let me know and how to get that. With warm regards, VKShukla Mobile 09818145650 Email:- vkshukla2001us@yahoo.com

    May 16, 2012

    शुक्ला जी नमस्कार ! आपकी सुंदर प्रतिकृया मिली अच्छा लगा। आप धड़कन, कवि संग्रह किसी भी बूक स्टॉल से ले सकते हैं….और मेरी वैबसाइट से भी सभी रचनाएँ पढ़ सकते हैं: http://www.drsuryabali.com

D33P के द्वारा
May 10, 2012

नमस्कार सूरज जी ,आजकल सूरज की रोशनी जागरण जंक्शन पर कुछ कम पड़ रही थी ,पर आज आपके पेज पर आकर लगा कुछ उजाला हुआ ……….. दिल के दरवाजे खुले है शौक़ से आ जाइए, हो गया है दिल मेरा अब तो ठिकाना आपका॥ इस क़दर अच्छा नहीं मुझको सताना आपका॥

    May 16, 2012

    दीप्ति जी नमस्कार ! आप लोगों ने याद किया और मैं फिर से हाजिर। कुछ वक़्त की कमी कारण मंच से दूर था…. आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

follyofawiseman के द्वारा
May 9, 2012

मरहबा…..मरहबा……! क्या सुंदर गज़ल लिखी है अपने…..मज़ा आ गया…….कमाल का है……अति सुंदर……! मन झूम उठा……दुपट्टे में छुपा के जाम का लाना…….कसम से क्या खूब कहा है आपने………! 

    May 16, 2012

    आपका ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है। आपकी सुंदर प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

मनु (tosi) के द्वारा
May 8, 2012

वाह ! वाह !क्या बात सूरज जी बहुत खूबसूरत गजल बधाई आपको !

    May 16, 2012

    मनु जी नमस्कार ! आपकी सुंदर और संक्षिप्त प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

rekhafbd के द्वारा
May 4, 2012

आदरणीय सूर्य जी ,अति सुंदर ग़ज़ल ,हार्दिक बधाई

krishnashri के द्वारा
May 4, 2012

आदरणीय बाली जी , सादर , आपकी इस ग़ज़ल के सभी शेर अपने आप में परिपूर्ण हैं किसी एक को उद्धृत करना दुसरे के साथ नाइंसाफी होगी और पूरी ग़ज़ल को उद्धृत करना बेवकूफी .अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई

jlsingh के द्वारा
May 4, 2012

देर आए दुरुस्त आए ! काफी दिनों से आपकी अनुपस्थिति खल रही थी आए तो सूरज का उजाला और चांदनी का शरमाना साथ लेकर आये! जितनी भी तारीफ की जाया कम है! २०१४ के मंत्रीमंडल में आप भी है शामिल, शपथ ग्रहण शायद आपका बाकी होगा!

    May 16, 2012

    जवाहर भाई नमस्कार ! आपकी तारीफ के लिए बहुत आभारी हूँ । मंत्रिमंडल में तो हम आपके साथ ही रहेंगे….आपको अब कहाँ छोड़ने वाले !!

shiromanisampoorna के द्वारा
May 4, 2012

aadarniya डॉ. सूर्या जी, अतिसुन्दर भाव संवेदना युक्त रचना बधाई……………./

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
May 3, 2012

अपूर्व !

akraktale के द्वारा
May 3, 2012

आदरणीय बाली जी नमस्कार, आपकी गजलें तो हमेशा से ही तारीफ़ के काबिल रही हैं. और जो मै कहना चाह रहा था आपकी गजल के शेर ने ही कह दिया है. आपका ये शेर आपके लिए मेरी जुबानी. आपके आने से हो जाती है ए महफिल जवां, तोड़ देता दिल सभी का दूर जाना आपका॥ बधाई.

    May 4, 2012

    अशोक भाई नमस्कार ! उम्मीद है सब कुछ बढ़िया होगा । आप लोगों का प्यार बड़ा अनमोल है ॥एक बार फिर से आप को पढ़ सकेंगे ! बहुत आभारी हूँ !

    May 4, 2012

    अशोक भाई नमस्कार ! उम्मीद है सब कुछ बढ़िया होगा । आप लोगों का प्यार बड़ा अनमोल है ॥एक बार फिर से आप को पढ़ सकेंगे ! बहुत आभारी हूँ !

चन्दन राय के द्वारा
May 3, 2012

डॉ साहब नमस्कार, आपकी अपनी विशिष्टता है , जो किसी भी रचनाकार के अन्दर होना आवश्यक है , बहुत ही संगीतात्मक भाव ,

minujha के द्वारा
May 3, 2012

डॉ साहब नमस्कार शायद देर आए दुरूस्त आए वाली कहावत किसी ने इन्ही परिस्थितियों के लिए लिखी होगी,आपकी सदाबहार गज़लों के बिना मंच बङा सूना पङ गया था,एक खूबसूरत रचना के साथ आपका स्वागत है.

    May 4, 2012

    मीनू जी नमस्कार ! मैं भी इधर दो महीने से आप लोगों की रचनाएँ नहीं पढ़ पाया और सुंदर रचनाओं से वंचित रहा, आप का बहुत बहुत धन्यवाद !

yamunapathak के द्वारा
May 3, 2012

इस ग़ज़ल को संगीत में पिरो कर गुनगुनाने को मजबूर हो जायेंगे सभी.शुरुआत ग़ज़लों और शेरोन की शौक़ीन यमुना ने कर दिया है.आपके कई ग़ज़ल मैंने अखबार में भी पढ़े थे.

    May 3, 2012

    यमुना जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया! ग़ज़लें गुनगुनाने और गाने का नाम है …..हम लिखते रहें और गाते रहे ॥यही तो है ज़िंदगी !!

shashibhushan1959 के द्वारा
May 3, 2012

आदरणीय डाक्टर साहब, सादर ! आपके लापता होने की एफ़० आइ० आर० लिखवाई थी ! भगवान् की कृपा से एक्शन बहुत जल्दी हुआ और आपकी यह दिलों की धड़कन बढ़ाती रचना पढ़ने को मिली ! मैं तो बस यही कहता हूँ…….. “नज्मों से आपकी है नशीली नहीं शराब ! प्यासे को जामे-नज़्म पिलाया तो कीजिये !”" हार्दिक बधाई !

    May 3, 2012

    डॉ साहब नमस्कार ! आपकी एफ़आईआर से पहले ही हाज़िर हो गया जनाब। मेरी मजाल जो आप कहे और मैं न आउन। ग़ज़ब का शेर मारा है भाई….मज़ा आ गया। आपकी आशीर्वाद के लिए बहुत आभारी हूँ ! धन्यवाद !

May 3, 2012

सादर प्रणाम! बहुत दिनों के बाद एक बार फिर आपको इस मंच पर देखकर किसी शायर कि एक कृति याद आ गयी … हमेशा बुजदिलो के दिल इरादे सर्द होते है, मुशीबत उनपर आती है जो सच्चे मर्द होते हैं, तड़पते हैं, सिसकते हैं, न जीते हैं, न मरते हैं, जो आशिक हैं तुम्हारे वो बड़े मुश्किल में रहते हैं…….हार्दिक आभार सर.!

    May 3, 2012

    अनिल भाई …अब ये तो पता नहीं किस बात पे आप ने ये शेर दे मारा …लेकिन बढ़िया है। कुछ व्यस्ततावस थोड़ा वक़्त लग गया मंच पे आने पे…..बहुत बहुत शुक्रिया!

rajkamal के द्वारा
May 2, 2012

पलके झुकाना तुम्हारा तो फिर ठीक था उनको उठा कर फिर से झुकाना गजब ढागया मेरा सलाम कबूल फरमाइयेगा आदरणीय डाक्टर साहिब !

    May 3, 2012

    राजकमल भाई नमस्कार ! आप कुच्छ भी उठाओ कुछ भी झुकाओ सब कहर ढा देता है….आपके जलवों का असर है। करम बनाए रखें !

vinitashukla के द्वारा
May 2, 2012

शब्दों का सुंदर संयोजन. सहज और प्रभावी अभिव्यक्ति. बधाई डॉक्टर साहब.

yogi sarswat के द्वारा
May 2, 2012

आदरणीय श्री डॉ . बाली जी सदर नमस्कार ! दिल के दरवाजे खुले है शौक़ से आ जाइए, हो गया है दिल मेरा अब तो ठिकाना आपका॥ ये अश’आर तो केवल एक बानगी भर है आपकी सुन्दर ग़ज़ल के खूबसूरत लफ़्ज़ों की ! वाह ! लेकिन एक शिकायत आप थे कहाँ इतने दिनों ? बहुत बहुत बढ़िया ग़ज़ल !

    May 2, 2012

    योगेंद्र जी बहुत बहुत शुक्रिया ! शिकायत तो अब आप की दूर हो गयी न…..अब मंच पर रेगुलर मिलेंगे!!

Mohinder Kumar के द्वारा
May 2, 2012

सूर्या बाली जी, पहले तो आप ये बताईये कि आप मरीजो वाले डाक्टर (MBBS) हैं या कि पढे लिखे डाक्टर (PhD). बढिया गजल लिखी है आपने इस लिये पूछ रहा हूं. मरीजों वाले डाक्टर तो ऐसी गजल कम ही लिख पायेंगे. हर शेर अपने आप में मुक्कमिल है. लिखते रहिये.

    May 2, 2012

    मोहिंदर भाई आपका ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत । मैं एमबीबीएस , एमडी वाला डॉक्टर हूँ…आपको ऐसा क्यूँ लगा की अच्छी गजले कम पढे लिखे ही लोग करते हैं…हहहहहहह .मैं बहुत सारे प्रॉफेश्नल व्यक्तियों को जानता हूँ जो बहुत अच्छे शायर या कवि हैं….खाई छोड़िए आपकी तारीफ मिली अच्छा लगा । आपका बहुत बहुत शुक्रिया

vikramjitsingh के द्वारा
May 2, 2012

डा. सूर्या जी…..सादर….. आप तो हमारी ही कैटागिरी के निकले…..बहुत अरसे बाद एक बहुत अच्छी गजल से तार्रुफ़ करवाया आपने…..हम को तो आपके बारे में आज ही पता चला….खैर कोई बात नहीं….अब तो आना-जाना लगा ही रहेगा…..बहुत सुन्दर गजल कही आपने…….आपके लिए…. ”हम ने सीने से लगाया…ये ना अपना बन सका… मुस्कुरा कर तुम ने देखा….दिल तुम्हारा हो गया……”

    May 2, 2012

    विक्रम जी आपको ग़ज़ल अच्छी लगी और आपकी दाद मिली इसके लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया। लेकिन माफ करिएगा मैं समझा नहीं आप क्यूँ ये कह रहे हैं की हम दोनों एक ही कैटेगरी के हैं….काइर मिलना जरूर होगा…

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
May 2, 2012

बहुत खूब! डॉ.साहब. हम भी तो आपके पुराने (चंद महीनों से ही सही) कद्रदानों में से एक हैं.काफी वक्त बाद एक खूबसूरत गजल की नुमाइन्द्गी हुई है,आपके द्वारा.गजल के सभी शेर बहुत अच्छे हैं. मेरा क्या मैं तो यहाँ पे हूँ मुसाफिर की तरह, सारी महफिल आपकी सारा ज़माना आपका दिल के दरवाजे खुले है शौक़ से आ जाइए, हो गया है दिल मेरा अब तो ठिकाना आपका वाह ! वाह !

    May 2, 2012

    राजीव जी को सादर नमन ! जनाब ये ज़िंदगी ही चंद पलों की है …मैं तो आपका बहुत बड़ा फैन हूँ आपको ग़ज़ल के चंद शेर पसंद आए और आपका प्यार मिला …इससे बड़ी चीज़ और क्या होगी मेरे लिए।

mparveen के द्वारा
May 2, 2012

डॉ साहब नमस्कार, लाजवाब शेरो शायरी करते हैं आप कमेन्ट करने को मजबूर हो जाते हैं हम इतनी अच्छी शायरी क्यूँ करते हैं आप ……….. :) …….. करते रहिये … धन्यवाद..

    May 2, 2012

    परवीन जी ये आपका बड़प्पन है जो इतना ज़र्रानवाज़ी करती हैं। आपको शेर पसंद आते हैं तो मुझे भी खुशी होती है। जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 2, 2012

आदरणीय बाली जी, सादर. kya शेर कहे हैं आपने शेर भी लजा गया बाद मुद्दत padhne को मिला मजा आ गया. एक शेर था मलीहाबाद में दुधवा चला गया एक शेर आप हैं की फिर मंच पे आ गया. दे दूं बधाई आप को गर स्वीकार हो. तपते हुए सूरज पे क्यों बादल चा गया. तुकबंदी की दाद chahunga हुजुर बधाई.

    May 2, 2012

    प्रदीप जी आपका आशीर्वाद है सब कुछ ठीक है बस थोड़ी व्यस्तता थी। अब फिर से आप लोगों को पढ़ सकूँगा। आपकी तुकबंदी में अथाह प्यार झलक रहा है। आपका बहुत आभारी हूँ ! धन्यवाद !

    shashibhushan1959 के द्वारा
    May 3, 2012

    आदरणीय डाक्टर साहब, आदरणीय प्रदीप भैया के लच्छन इस समय कुछ ठीक नहीं दीख रहे हैं ! हिंदी लिखते-लिखते अंग्रेजी लिखने लग जा रहे हैं ! कई-कई दिन गुम हो जा रहे हैं ! बुढ़ौती का असर होने लगा ! कोई इंजेक्शन वगैरह ठोकिये ! (क्षमाप्रार्थना सहित )

      May 3, 2012

      भाई साहब…जब प्यार उमड़ता है तो कैसा भी विशुद्ध हिन्दी हृदय हो …अङ्ग्रेज़ी आ ही जाती है….प्रदीज़ जी आप बिलकुल इनकी बातों पे मत आयेगा…इंजेक्टिओन लेने की कोई जरूरत नहीं …………….हाहाहहहाहा॥

dineshaastik के द्वारा
May 2, 2012

हो गई रंगीन  महफिल  हुआ   आना आपका। मुझको क्यों मालुम  नहीं क्यों था जाना आपका। सच  कहूँ आता नहीं, सूरज  गजल  लिखना मुझे, आपकी गजलें बनाती हैं दिवाना आपका। खुद तो अपना घर नहीं है, रह रहा फटपाथ पर, किन्तु देखो दिल  में मेरे है ठिकाना आपका। आज  का दिन खुशनुमा, बीतेगा निश्चित ही मिरा, इस  गजल  के रूप  में जो मुस्कराना आपका।

    May 2, 2012

    दिनेश जी इतना सारा प्यार देने के लिए आपका बहुत आभारी हूँ ! खूबसूरत पंक्तियाँ लिख डाली हैं आपने।

ajaydubeydeoria के द्वारा
May 2, 2012

आदरणीय डा, साहब सादर. अपने क़द्र-दानों को छोड़ कर यूँ न जाया कीजिये. कभी-कभार ही सही नज़र आया कीजिये आपके आने से हमारी यह महफ़िल रौशन हुयी मेहरबानी आपकी, शुक्रिया आपका .

    May 2, 2012

    अजय भाई नमस्कार। यार छोड़ कर नहीं गया …बस व्यस्तता के कारण समय नहीं दे प रहा था इस लिए कुछ दिन ग़ायब रहा !आपके स्नेह के लिए बहुत आभारी हूँ !!

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    May 2, 2012

    आज कुछ मौसम खुशगवार लग रहा है. कई दिनों से यहाँ पर जो उठा-पटक चल रही थी उससे मन खिन्न हो चला था. कई अवांछित तत्वों ने यहाँ के माहौल को भी प्रदूषित करना शुरू कर दिया था. आप जैसे लोगों की यहाँ पर अत्यंत ही आवश्यकता है. बाकि आप व्यस्त रहिये…..मस्त रहिये…….स्वस्थ रहिये…….

anurag mishra के द्वारा
May 2, 2012

kya baat hai Dr. sab… dil ko cho gayi ye line……. ज़िंदगी भर के लिए एहसान मुझ पे कर गया, कल दुपट्टे में छुपा के जाम लाना आपका॥ dil se inshann aap acche the pata tha, par ek acche kavi bhi hai aaj maloom hua.. my heartiest greeting

May 2, 2012

बहुत बहुत शुक्रिया जनाब ! 

jalaluddinkhan के द्वारा
May 2, 2012

“मेरा क्या मैं तो यहाँ पे हूँ मुसाफिर की तरह, सारी महफिल आपकी सारा ज़माना आपका॥” बहुत खुबसूरत ग़ज़ल.आपका कोई जवाब नहीं.

ANAND PRAVIN के द्वारा
May 1, 2012

आदरणीय सूरज सर, सादर प्रणाम सबसे पहले तो आपके लिए…….. आपके आने से हो जाती है ए महफिल जवां, तोड़ देता दिल सभी का दूर जाना आपका॥………आप ऐसी पन्तियाँ लिखते है फिर भी दूर चले जाते है…….. बाकी तो आपकी गजल पर क्या कहना…………..जैसे थे वैसे ही रहेंगे………….जोरदार + धारदार


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