दिल की बातें दिल से

www.drsuryabali.com

47 Posts

5291 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 7037 postid : 200

उजाड़ सकता है घर वो बना नहीं सकता

Posted On: 18 Feb, 2012 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

उजाड़ सकता है घर वो बना नहीं सकता॥

बना तो लेता है रिश्ते निभा नहीं सकता॥

मकान उसका भी शीशे का बना है यारों,

मुझे पता है वो पत्थर उठा नहीं सकता॥

चुरा तो सकता है वो ज़र1 जमीन को मेरी,

हुनर हमारा मगर वो चुरा नहीं सकता॥

हो खोट दिल में रक़ाबत2 हो जिसके सीने में,

किसी से नज़रें कभी वो मिला नहीं सकता॥

हबीब3 बन के ख़ुदा साथ खुद रहे जिसके,

जहां में कोई भी उसको झुका नहीं सकता॥

दीवार बन के खड़ा है वो मेरी राहों में,

वो समझता है उसे मैं गिरा नहीं सकता॥

उसे हमारी फ़िक्र हो न हो कभी “सूरज”

मैं उसकी यादों को दिल से मिटा नहीं सकता॥

डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”


1. ज़र=दौलत, संपत्ति 2. रक़ाबत= ईर्ष्या 3. हबीब= मित्र

| NEXT



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (17 votes, average: 4.76 out of 5)
Loading ... Loading ...

41 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lilly के द्वारा
July 11, 2016

I must say, I’m rather surprised that you di#n1d82&7;t include Just Cause 2 or Dead Rising 2. Those were probably the best games of the year, probably because of the amount of replay value they each offer. But anyways, great list Joe! Here’s hoping that 2011 has some amazing game releases! *cough* Skyrim *cough*

sadhana thakur के द्वारा
February 19, 2012

सूरज जी ,बहुत खूब ..बहुत अच्छा लिखा है ,अपने विचार भी दें …..बधाई हो ……..

    February 21, 2012

    साधना जी नमस्कार! आपको बहुत बहुत धन्यवाद आपकी तारीफ मिलती है तो बहुत अच्छा लगता है।

Rajkamal Sharma के द्वारा
February 18, 2012

आदरणीय डाक्टर साहिब ….. सादर अभिवादन ! चुरा तो सकता है वो ज़र1 (जोरू ) जमीन को मेरी, प्यार हम जैसा मगर उसको वोह दे नहीं सकता॥ मुबारकबाद सहित :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    February 21, 2012

    राजकमल भाई सादर नमस्कार ! प्रतिक्रिया स्वरूप आपका स्नेह मिला अच्छा लगा॥आपका बहुत बहुत धन्यवाद…जोरू को कौन ज्यादा प्यार दे सकता है ये तो जोरू, आप या वो ही जाने…………….मुझे कैसे पता चलेगा !! :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

राजेश राज के द्वारा
February 18, 2012

डॉ साहब नमस्कार, बहुत सुंदर ग़ज़ल ! खूबसूरत रचना के लिए बधाई

Rashmi Singh के द्वारा
February 18, 2012

Hello Sir, I liked this ghazal a lot specially second sher…are you PhD or real Doctor…really good ghazal.

    February 21, 2012

    रश्मि जी नमस्कार ! आपका ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है। आपको ग़ज़ल पसंद आई और आपकी प्रतिक्रिया मिली अच्छा लगा। आपका बहुत बहुत धन्यवाद म…मैं PHD वाला डॉक्टर नहीं हूँ॥

D33P के द्वारा
February 18, 2012

सूरज चमका आसमान में उसे कोई छु नहीं सकता दहक उसकी कोई पानी से बुझा नहीं सकता कोई नज़र उठा तो सकता है पर मिला नहीं सकता उसे भी हमारी फ़िक्र है पर वो बता नहीं सकता सूरज जी बहुत खूबसूरत है आपकी लेखनी .

    February 21, 2012

    दीप्ति जी नमस्कार ! क्या पंक्तियाँ जोड़ी हैं आपने…मशाल्लाह ! इतनी तारीफ के लायक हूँ भी कि नहीं मुझे नहीं पता। लेकिन आप लिखती बहुत अच्छा हैं। आपका बहुत बहुत शुक्रिया !!!

manojjohny के द्वारा
February 18, 2012

मित्रवर आपको समर्पित कुछ पंक्तियाँ : शहर में आजकल, घर वो, बना नहीं सकता। इधर-उधर से जो, ’ऊपरी’ कमा नहीं सकता। कार्डों, गिफ़्टों के दौर में, सिर्फ दिल से बना तो सकता है रिश्ते, निभा नहीं सकता जुल्म, अन्याय, गरीबों पे होने से, मीडिया कमा तो सकता है, उनको मिटा नहीं सकता खुद्दारी अब भी, आशिकों में, बची है ‘जानी’ दर्द में, रो तो सकता है, पर दिखा नहीं सकता

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    February 18, 2012

    मनोज जी, क्या खूब लिखा है आपने बधाई हो

    February 21, 2012

    मनोज भाई ! पहले तो आपका ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। आपकी रचना पसंद आई ॥आपको बहुत बहुत धन्यवाद !!!

ANAND PRAVIN के द्वारा
February 18, 2012

चुरा तो सकता है वो ज़र1 जमीन को मेरी, हुनर हमारा मगर वो चुरा नहीं सकता॥ क्या खुबसूरत शेर कहा है सर हुनर तो वाकई कोई किसी का चुरा नहीं सकता आपकी पंतियों को सलाम

    February 21, 2012

    आनंद भाई नमस्कार ! आपने बिलकुल सही कहा”हुनर तो वाकई कोई किसी का चुरा नहीं सकता”॥आपके तारीफ के लिए शुक्रिया!

mparveen के द्वारा
February 18, 2012

हबीब3 बन के ख़ुदा साथ खुद रहे जिसके, जहां में कोई भी उसको झुका नहीं सकता॥ डॉ साहब नमस्कार, बहुत सुंदर ग़ज़ल …

    February 21, 2012

    परवीन जी नमस्कार !ग़ज़ल पर आपकी तारीफ मिली॥आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! ऐसे ही स्नेह बनाए रखें !!

minujha के द्वारा
February 18, 2012

डाँ सुर्या जी,नमस्कार आपकी गज़लें इतनी खुबसूरत होतीं है कि पढते ही जुबां से वाह निकल पङती है,बधाई हबीब बन के ख़ुदा साथ खुद रहे जिसके, जहां में कोई भी उसको झुका नहीं सकता॥ बहुत खुब

    February 21, 2012

    मीनू जी नमस्कार ! ये मेरी ग़ज़लों का नहीं आप जैसे प्रबुद्ध रचनाकारों का स्नेह है जो इतनी हौसला आफजाई मिलती है। आपको ग़ज़लें अच्छी लगती हैं और आपकी सुंदर प्रतिकृया मिलती है यही हमारे लिए अनमोल है। आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

alkargupta1 के द्वारा
February 18, 2012

  सूरज जी , बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल.. ..ग़ज़ल का प्रत्येक शेर स्वयं में भाव प्रधान व अर्थपूर्ण है उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई

    February 21, 2012

    अल्का जी नमस्कार ! आपकी तारीफ और हौसलाफजाई के लिए आपका बहुत आभारी हूँ…ऐसे ही स्नेह बनाए रखें ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
February 18, 2012

बहुत खूबसूरत गजल,डॉ.साहब.अवकाश से आते ही पुनः इस मंच पर स्वर्णिम आभा बिखेर दी है. “मकान उसका भी शीशे का बना है यारों मुझे पता है वो पत्थर उठा नहीं सकता चुरा तो सकता है वो ज़र जमीन को मेरी हुनर हमारा मगर वो चुरा नहीं सकता ” क्या उम्दा पंक्तियाँ हैं.

    February 21, 2012

    राजीव जी नमस्कार ! आपकी खूबसूरत और उत्साह वर्धक प्रतिक्रिया मिली…बहुत खुशी हुई। आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!

Rajesh Tiwari के द्वारा
February 18, 2012

हो खोट दिल में रक़ाबत2 हो जिसके सीने में, किसी से नज़रें कभी वो मिला नहीं सकता॥ kYAA BAAT HAI DR. SAHEB MAZA AA GAYA ….BADHAI HO ITANI ACHCHHI RACHNA KE LIYE

    February 21, 2012

    राजेश जी नमस्कार !आपको शेर पसंद और आपकी दाद मिली आपका बहुत बहुत शुक्रिया!

अलीन के द्वारा
February 18, 2012

डॉ साहब, सादर प्रणाम! मैं तो आपकी इस रचना पर इतना ही कहूँगा कि जो पैदा हुआ है, प्रकाशित करने को सारा जहाँ, उस दहकते ‘सूरज’ को, कोई बुझा नहीं सकता. एक बार फिर आप अपनी रचना में एक नया सन्देश लेकर आये, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.

    February 20, 2012

    अलीन जी नमस्कार !आपकी ये लयबध्द काव्यात्मक प्रतिकृया के क्या कहने …इतनी तारीफ लायक हूँ की नहीं मुझे नहीं पता॥लेकिन आप लोगों का प्यार ऐसे मिलता रहे तो रचनाओं मे नई जान आ जाती है। आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 18, 2012

चुरा तो सकता है वो ज़र जमीन को मेरी, हुनर हमारा मगर वो चुरा नहीं सकता॥ आदरणीय बाली जी, सुप्रभात प्रोत्साहित करने वाले भाव. स्नेह बनाये रखिये. बधाई.

    February 20, 2012

    प्रदीप जी सादर नमस्कार ! आपका बहुमूल्य आशीर्वाद मिला इस रचना को ॥मेरी मेहनत सफल हुई आप जैसे गुणी जनों का स्नेह मिलता रहे तो ये सफर कभी खत्म ही न हो आप ऐसे ही अपना स्नेह बनाए रखें…सधन्यवाद !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 18, 2012

आदरणीय डाक्टर साहब, सादर ! “”सुनहरी धूप निकल आई आप आये तो, कोई बादल न आफताब को छुपा सकता ! भ्रमर जी कैद हो गए हैं क्या फिर फूलों में, काश, उनका पता कोई हमें बता सकता !! ग़ज़ल के एक – एक शेर मोतियों जैसे, मैं चाँद “सूर्य” को दीपक नहीं दिखा सकता !!!”" . शानदार ! बेहतरीन !! दिलकश !!!

    February 20, 2012

    डॉ॰ साहब सादर नमस्कार ! इतना खूबसूरत अंदाज़ आपके सिवा और कहीं देखने को नहीं मिलता॥खूबसूरत पंक्तियाँ जोड़ी है आपने ने ….आपके सुंदर और प्यारी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

akraktale के द्वारा
February 18, 2012

बाली जी सादर नमस्कार, आप के आते ही शायद केप्चा भी ठीक हो गया कल शाम को किसी को कोई प्रतिक्रया ही नहीं दे पा रहे थे. चुरा तो सकता है वो ज़र1 जमीन को मेरी, हुनर हमारा मगर वो चुरा नहीं सकता॥ बहुत ही खूब गजल कई दिनों से इसकी कमी थी मंच पर आप के आने से फिर ये कमी ख़त्म हुई.बधाई.

    February 20, 2012

    अशोक भाई नमस्कार ! सब आपकी दुवाओं का असर है। आप लोगों का प्यार इस मंच से दूर रहने नहीं देता॥आपका स्नेह मिलता रहे ऐसी ही अपेक्षा है। आपकी तारीफ के लिए आपका बहुत बहुत आभारी हूँ।

nishamittal के द्वारा
February 18, 2012

बहुत सुन्दर रचना के साथ आपने पुनः दर्शन दिए उसे हमारी फ़िक्र हो न हो कभी “सूरज” मैं उसकी यादों को दिल से मिटा नहीं सकता॥ पंक्तियाँ तो बहुत ही अच्छी लगी

    February 20, 2012

    निशा जी नमस्कार !आपको कुछ पंक्तियाँ पसंद आई बहुत सुकून मिला…ऐसे ही आप अपना आशीर्वाद बनाए रखे !साधन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
February 18, 2012

सूरज जी नमस्कार…..इंतजार लम्बा हो गया…आते ही बेहतरीन रचना…..बधाई,,,,,,

    February 20, 2012

    दिनेश भाई नमस्कार ! आप सही कह रहे हैं लेकिन आप लोगों से दूर ज्यादा दिन नहीं रह पाते….आपकी तारीफ मिली और हौसला बढ़ाया इसके लिए बहुत सारा धन्यवाद !!

jlsingh के द्वारा
February 18, 2012

डोक्टर साहब नमस्कार! काफी दिनों बाद आपके दर्शन हुए और आते ही आपने धमाका कर दिया! आदाब अर्ज है साहब! चुरा तो सकता है वो ज़र जमीन को मेरी, हुनर हमारा मगर वो चुरा नहीं सकता॥

    February 20, 2012

    जवाहर भाई नमस्कार !आपका प्यार और आशीर्वाद मिला बहुत अच्छा लगा। बहुत बहुत धन्यवाद !!


topic of the week



latest from jagran