दिल की बातें दिल से

www.drsuryabali.com

47 Posts

5291 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 7037 postid : 141

अश्क़ों से अपने गाल भिगोया कभी नहीं

Posted On: 21 Dec, 2011 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

crying-woman

ग़म-ए-ज़िंदगी1 से डरके मैं रोया कभी नहीं॥

अश्क़ों2 से अपने गाल भिगोया कभी नहीं॥


हर सिम्त3 है धुआं यहाँ हर सिम्त आग है,

इस खौफ़4 से ही चैन से सोया कभी नहीं॥


दिल में जिगर में था वही साँसों में था वही,

आँखों के सामने से वो खोया कभी नहीं॥


ख़ुशबू बदन की उसके ना उड़ जाये इसलिए,

बिस्तर की अपने चादरें धोया कभी नहीं॥


लेकर बहुत से दर्द वो चुपचाप मर गया,

कांटे किसी की राह मे बोया कभी नहीं॥


मज़बूरियाँ थी ज़िंदगी भर साथ में मगर,

रिश्तों को बोझ समझ के ढोया कभी नहीं॥


यह सोचकर कि फूल के सीने में भी है दिल,

“सूरज” सुई से हार पिरोया कभी नहीं॥


डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

ग़म-ए-ज़िंदगी1 =जीवन का दुख, अश्क़2 = आँसू,  सिम्त3= दिशा,  खौफ़4=डर

*चित्र गूगल से साभार

| NEXT



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (22 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

75 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Chasmine के द्वारा
July 11, 2016

July 23, 2012 at 5:07 amih/>ta<s is my industrial project i am trying to combine this both machine rolling and wire drawing first casted rod goes in rolling machine n then this rod goes for wire drawing Reply

nancy4vaye के द्वारा
February 28, 2012

नमस्ते प्रिय! मेरा नाम नैन्सी है, मैं अपनी प्रोफ़ाइल को देखा और अगर आप कर रहे हैं आप के साथ संपर्क में प्राप्त करना चाहते मुझ में भी दिलचस्पी तो कृपया मुझे एक संदेश जितनी जल्दी भेजें। (nancy_0×4@hotmail.com) नमस्ते नैन्सी ***************************** Hello Dear! My name is Nancy, I saw your profile and would like to get in touch with you If you’re interested in me too then please send me a message as quickly as possible. (nancy_0×4@hotmail.com) Greetings Nancy

Rajkamal Sharma के द्वारा
January 5, 2012

ख़ुशबू बदन की उसके ना उड़ जाये इसलिए, बिस्तर की अपने चादरें धोया कभी नहीं॥ आदरणीय सूरज जी अगर वोह हसीना हमको छू भी ले तो हम उसकी खुशबू उड़ने के डर से कभी नहाये ही नहीं – हा हा हा हा हा नया (पांच दिन पुराना ) साल मुबारक

    January 5, 2012

    राजकमल भाई नमस्कार ! आप आए मेरी महफिल मे बहार आयी है। इस नए साल में खुशियों की फुहार आयी है। खूब ये साल मुबारक हो आपको भाई, दिल की गहराइयों से ये पुकार आयी है। साभार सूरज

anandpravin के द्वारा
January 5, 2012

ना भिंगोया तो सही, गर भींग जाते तो बुरा, दर्द जो इसमें दिखाया, सांस थामे हूँ पड़ा II “सूरज” जी कविता के “उस्ताद” को इस “नवजात” का सलाम

    January 5, 2012

    आनंद जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया ! आपकी प्रतिकृया देने की अदा पसंद आई। कोई उस्ताद नहीं हूँ भाई मैं भी आपकी तरह ही हूँ…फिर भी आपका तहे दिल दे आभारी हूँ। आपका ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है। साभार !नव वर्ष मंगलमय हो !

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
January 4, 2012

डॉ साहब आप की ग़ज़लें लाजवाब है ….. बहुत खूबसूरत है आपकी ग़ज़ल किसी एक शेर की क्या कहें … और यह सोचकर कि फूल के सीने में भी है दिल, “सूरज” सुई से हार पिरोया कभी नहीं॥ ये शेर तो दिल छू लेता है …

    January 4, 2012

    शैलेश भाई नमस्कार ! आपकी दाद मिली बहुत खुशी हुई। आप जैसे क़द्रदानों से मंच पर अच्छी रचनाएँ देने का दबाव बढ़ जाता है। आपकी सुंदर प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया !!! नया साल मुबारक हो !!!

Mrityunjay mishra के द्वारा
January 3, 2012

good ghazal Dr. sahab very very funny ghazal. naye varsh ki badhai ho.

    January 3, 2012

    मृतुंजय जी नमसकार ! ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है। आपकी प्रथम प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! आपको भी नया साल मुबारक हो !!साभार

shiromanisampoorna के द्वारा
January 3, 2012

आदरणीय सूरज जी,एक-एक शब्द और भाव,अतिसुन्दर,संवेदना से परिपूर्ण bahut-बहुत badhai……../ ख़ुशबू बदन की उसके ना उड़ जाये इसलिए,बिस्तर की अपने चादरें धोया कभी नहीं॥ लेकर बहुत से दर्द वो चुपचाप मर गया,कांटे किसी की राह मे बोया कभी नहीं॥ मज़बूरियाँ थी ज़िंदगी भर साथ में मगर,रिश्तों को बोझ समझ के ढोया कभी नहीं॥ यह सोचकर कि फूल के सीने में भी है दिल,“सूरज” सुई से हार पिरोया कभी नहीं॥

    January 3, 2012

    आदरणीय शिरोमणि संपूर्णा जी ! आपका आशीर्वाद मिला प्रशन्नता हुई । आपको बहुत बहुत धन्यवाद !

praveen tiwari 'raunak' के द्वारा
January 2, 2012

सूरज जी नमस्कार…..बहुत ही सुन्दर गजल, नव वर्ष मंगलमय हो…….बधाई

    January 2, 2012

    रौनक जी आपका ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है आपकी तारीफ के बहुत बहुत शुक्रिया जनाब !आपको भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

Dr.Shailesh Gaur के द्वारा
January 1, 2012

good ghazal dr sahab…..achchha likhate hain. Badhai ho. Naye varsh ki badhai

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
January 1, 2012

बहुत अच्छी गजल लिखी है आपने. ‘यह सोचकर कि फूल के सीने मैं भी है दिल,सूई से हार पिरोया कभी नहीं’ बहुत सुन्दर पंक्तियाँ हैं. …राजीव(dehat.jagranjunction.com)

    January 1, 2012

    राजीव जी नमस्कार ! आपका ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है। और तारीफ के लिए आप का बहुत बहुत शुक्रिया। आपको नववर्ष की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएँ !!

sushil के द्वारा
December 31, 2011

Bali sahab, maine pahli baar apki likhi huyi ye panktiyaan padhi, aapne to dil hi chhoo liya inse. aate rahiyega..

    December 31, 2011

    सुशील जी आपका मंच पर हार्दिक स्वागत है। ग़ज़ल आपके दिल तक पहुंची और आपकी तारीफ मिली बहुत अच्छा लगा…आपको धन्यवाद और नव वर्ष की शुभकामना!

gauravsaxena के द्वारा
December 30, 2011

Ultimate “GAZAL” मज़बूरियाँ थी ज़िंदगी भर साथ में मगर, रिश्तों को बोझ समझ के ढोया कभी नहीं॥ Very touchy line …. may MAA SARASWATI bless you… Regards Gaurav Saxena

    December 30, 2011

    गौरव जी नमस्कार ! आपका मंच पर हार्दिक स्वागत है। आपको ग़ज़ल पसंद आई और आपकी प्यार भरी प्रतिक्रिया मिली उसके लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया …आशा करता हूँ आपको भविष्य मे भी अच्छी रचनाएँ देता रहूँ और आपका प्यार पता रहूँ….साभार !!

Rekha के द्वारा
December 29, 2011

Hi Today I saw ur nice n heart touching poems , I m Speechless …………..Khushboo badan ki na ud jaye isliye, bistar ki apne chadare dhoya kabhi nahi ……………. laker bahut dard wo chup chap mar gya …………. boya hi nahi ………. bahut dard hai ………….. in lines me ……

    December 29, 2011

    रेखा जी नमस्कार ! आपका मंच पर हार्दिक स्वागत है…और आपकी प्रथम प्रतिकृया पर बहुत बहुत धन्यवाद…आपको इस ग़ज़ल के कुछ शेर पसंद आए…मेरी मेहनत सार्थक हुई…साभार !

dineshaastik के द्वारा
December 28, 2011

दिल की गहराईयों तक उतरने वाली गजल। इसे पढ़कर सचमुच मेरी आँखें हो गईं सजल।।  http://dineshaastik.jagranjunction.com/

    December 29, 2011

    दिनेश जी नमस्कार । आपका ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत और अभिनंदन । ग़ज़ल आपके दिल की गहराइयों तक पहुंची बहुत अच्छा लगा आपका प्यार मिलता रहे एसी आशा करता हूँ…आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

Roshan Dhar Dubey के द्वारा
December 27, 2011

दिल तो बहुत रोया उनसे बिछडने के बाद, मगर इन आंखो मे अस्क आने दिया हि नहि, सुरज कि रोशनि कहि उडा ना दे उनके लगाये रंगो को मेरी हथेलि से, इसिलिये कभि सुरज के उजाले मे मै गया हि नहि…! लेखक: रोशन धर दुबे… श्रि सुर्या बाली जि को मै नादान रोशन कि तरफ से नमस्कार… हमे आपकी रचित कविताये बहुत बहुत अछि लगी…हमे आसा है कि आप और  आप कि कविताओ से मुझे सिखने का मौका मिलेगा..

    Sanjay Pant के द्वारा
    December 27, 2011

    सही कहा रोशन जी आपने ने मैं भी डॉ बाली से बहुत कुछ सीख रहा हूँ…कम से कम मंच पर उम्दा ग़ज़लें पढ़ने को मिल रही है….

      December 29, 2011

      संजय भाई नमस्कार ! ये तो आपका बड़प्पन है जो एस कह रहे है…मैं भी आप लोगों से ही सीखता हूँ…..आपको बहुत बहुत धन्यवाद …

    December 29, 2011

    रोशन भाई नमस्कार …क्षमा करिएगा बिलंब से उत्तर लिखने के लिए……कई दिन तक इंटरनेट विहीन रहा …बस ऐसा हैदर रहता है किसी खास चीज़ को खोने का रोशन जी …आप हमसे और मैं आपसे सीखते है….आपका बहुत बहुत आभार !

Rajeev Mani के द्वारा
December 26, 2011

डॉ. साहेब बहुत बढ़िया ग़ज़ल लिखी है आपने .बधाई हो इतनी सुन्दर रचना हम लोगों तक पहुचाने के लिए ..आपका राजीव

Santosh Kumar के द्वारा
December 25, 2011

डॉ.साहब ,.सादर नमस्कार बहुत ही सुन्दर रचना ,..बेहतरीन कलमकारी ,..हार्दिक बधाई

    December 25, 2011

    संतोष भाई नमस्कार !आपकी तारीफ के लिए बहुत बहुत शुक्रगुजार हूँ। आपका प्यार मिलता रहे बस यही कामना रहती है !!

Sanjay Pant के द्वारा
December 25, 2011

Great thoughts Sir! I really appreciate your writing skills keep it up.

सुरभि गौड़ के द्वारा
December 25, 2011

डॉ॰ बाली आप तो छुपे रुस्तम निकले। आपकी शायरी तो रंग पकड़ रही है। ये पंक्तियाँ तो आशिक़ी की हद तक ले जाती है>>> ख़ुशबू बदन की उसके ना उड़ जाये इसलिए, बिस्तर की अपने चादरें धोया कभी नहीं॥ >

    December 25, 2011

    सुरभि जी नमस्कार । आपका ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत !आपको ये शेर पसंद आया आपका बही बहुत शुक्रिया !!!!!!!

sumandubey के द्वारा
December 24, 2011

सूरज जी नमस्कार , बहुत बढ़िया लाईने ——————————————————————————लेकर बहुत से दर्द वो चुपचाप मर गया, कांटे किसी की राह मे बोया कभी नहीं॥

    December 24, 2011

    सुमन जी नमस्कार ! आपको ग़ज़ल का ये शेर अच्छा लगा ,मुझे खुशी है। आपकी सुंदर प्रतिक्रिया मिली आप का तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया॥

shashibhushan1959 के द्वारा
December 23, 2011

आदरणीय डाक्टर साहब, सादर ! “यह सोचकर कि फूल के सीने में भी है दिल, “सूरज” सुई से हार पिरोया कभी नहीं॥”" . “लेकिन अगर मरीज जो लेता हो सामने, उसको सूई चुभोने में सोचा कभी नहीं.”" हा हा हा !!!!!! बहुत लाजवाब ग़ज़ल.! बधाई !!!!

    December 24, 2011

    बहुत बहुत शुक्रिया शशि भूषण जी । आपकी प्रतिक्रिया बहुत अच्छी लगी और आपके के लिए चंद पंक्तियाँ: ये डाक्टर जी आपको बिलकुल न अंदेशा, कारण यही था हमने छोड़ा जो ये पेशा, दस साल गवा डाले मैंने डाक्टरी पढ़ के, फिर मैंने है अपनाया शायर का ये भेषा॥ साभार सूरज

mparveen के द्वारा
December 23, 2011

डॉ साहब नमस्कार, इतनी सुंदर कवितायेँ आप कैसे लिखते हैं??? . तारीफ के लिए शब्द ही नहीं मिल रहे हैं . वाकई में खूबसूरत रचना . ढेरो बधाई !!!!

    December 23, 2011

    परवीन जी नमस्कार ! आपको बहुत बहुत बधाई और शुभ कामनाएँ आपको ब्लोगर ऑफ द वीक बनाने पर। आप की हौसला अफ़ज़ाई और ज़र्रा नवाज़ी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया !!

roshni के द्वारा
December 23, 2011

डॉ. साहिब जी किस पंक्ति की तारीफ करू हर पंक्ति कमाल है … बहुत ही सुंदर ग़ज़ल .. आभार

    December 23, 2011

    रोशनी जी नमस्कार !आपको ग़ज़ल पसंद आई और आपकी तारीफ मिली मुझे बहुत अच्छा लगा। आपकी प्रतिक्रिया के बहुत बहुत शुक्रिया!

December 22, 2011

आदरणीय डॉ सूरज जी, सादर नमस्कार ! सुंदर सकारात्मक भावों को लिए आपकी बहुत ही सुंदर रचना पढ़कर बहुत अच्छा लगा । हमेशा की भांति….अंतिम पंक्तियों ने बहुत प्रभावित किया । यह सोचकर कि फूल के सीने में भी है दिल, “सूरज” सुई से हार पिरोया कभी नहीं॥ . हार्दिक बधाई…..सादर आभार !! :)

    Dr. Surya Bali "Suraj" के द्वारा
    December 23, 2011

    संदीप भाई नमसकार , आपकी प्रतिक्रिया मिली बहुत अच्छा लगा। आपका बहुत बहुत शुक्रगुजार हूँ…………बहुत बहुत धंय़वाद  

    December 23, 2011

    संदीप जी नमस्कार ! दर्द का अपना ही अंदाज़ हुआ करता है॥ निखरता वो है जिसे दर्द मिला करता है॥ सूइयाँ चुभने से पहले महज़ है फूल मगर । दर्द जब सहता है हार बना करता है॥ आपका बहुत बहुत शुक्रिया

akraktale के द्वारा
December 22, 2011

बाली जी सादर नमस्कार, मज़बूरियाँ थी ज़िंदगी भर साथ में मगर, रिश्तों को बोझ समझ के ढोया कभी नहीं॥ यह सोचकर कि फूल के सीने में भी है दिल, “सूरज” सुई से हार पिरोया कभी नहीं॥ बहुत बढ़िया दर्द भरी गजल. बधाई.

    December 23, 2011

    अशोक भाई नमस्कार ! ख़याल आपका आया तों रो लिया मैंने, दर्द जब मेरा सताया तो रो लिया मैंने, मुझे लगता था मेरा दर्द बहुत है लेकिन, हाले-दिल उसने सुनाया तो रो लिया मैंने ॥ आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

manoranjanthakur के द्वारा
December 22, 2011

बहुत ही दिल को छूती सुंदर सव्दो का संयोजन

allrounder के द्वारा
December 22, 2011

नमस्कार डॉक्टर साहब, बेहतरीन अल्फाजों से सज्जित रचना पर एक बार फिर से आपको हार्दिक बधाई !

    December 22, 2011

    सचिन भाई नमस्कार !आपकी शानदार प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया !आपकी दाद मिलती है तो हौसला बढ़ जाता है ! स्नेह बनाए रखें !! साभार।

Pankaj Singh के द्वारा
December 21, 2011

Excellent Dr. Bali !Doctor and ghazalkaar what a combination….despite of so much responsibilities you could spare some time for poetry……really amazing !

Piyush Raghav के द्वारा
December 21, 2011

डॉ साहब क्या बात है , बहुत ही उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई। भाई ऐसे विचार आते कहाँ से हैं आप के जहन में ……लिखते रहिए मैं तो आपका कायल हो गया जनाब ।

    December 22, 2011

    पीयूष भाई नमस्कार !भाई ये तो सब आप जैसे चाहने वालों की दुवाएँ हैं जो कुछ अच्छा लिखने के लिए बल देती हैं। आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

Amita Srivastava के द्वारा
December 21, 2011

डॉ सूर्या जी नमस्कार यह सोचकर कि फूल के सीने मे भी है दिल , सूरज सुई से हार पिरोया कभी नही बहुत खूब ,बहुत ही गहराई लिए गजल

    jlsingh के द्वारा
    December 22, 2011

    डॉ. साहब बहुत खूब, बहुत खूब! इरशाद!

      December 22, 2011

      जवाहर भाई नमस्कार ! आपके कमेंट के बिना तो लगता है कुछ खाली खाली सा है ॥इधर बीच थोड़ा नेट से दूर हो गया था इसलिए मंच पर नहीं आ सका लेकिन आपकी बेहतरीन रचनाओं से कल ही रूबरू हुआ बहुत अच्छा। आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!!

    December 22, 2011

    अमिता जी नमस्कार !आपको ग़ज़ल का मकता पसंद आया और ग़ज़ल के लिए आपकी प्रतिक्रिया मिली बहुत अच्छा लगा। आपका बहुत बहुत शुक्रगुजार हूँ , अपना आशीर्वाद बनाए रखें !!

nikhil pandey के द्वारा
December 21, 2011

यह सोचकर कि फूल के सीने में भी है दिल, “सूरज” सुई से हार पिरोया कभी नहीं॥ सर जी क्या उम्दा पंक्तिया है … बहुत खुबसूरत ग़ज़ल है ….

    December 22, 2011

    निखिल जी नमस्कार !आपका मंच पर हार्दिक स्वागत और अभिनंदन ! आपको रचना अच्छी लगी और आपकी प्रतिक्रिया स्वरूप प्यार मिला बहुत अच्छा लगा…आपका तहे दिल से शुक्रिया !!!

abodhbaalak के द्वारा
December 21, 2011

वाह वाह वाह, हर बार की तरह इस बार भी बस यही कह सकता हूँ जनाब. बेहतरीन http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    December 22, 2011

    अबोध भाई जी नमस्कार ! बिना आपके प्रतिक्रिया के लगता है ग़ज़ल अधूरी रहती है…..आपका आशीर्वाद मिलता है तो मज़ा आ जाता है….बस ऐसे आप अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखें !!साभार…………..

sadhana thakur के द्वारा
December 21, 2011

सूरज जी ,बहुत खूब ..फूल के सीने में भी दिल है ,इसलिए सुई से हार पिरोया कभी नहीं …बेहतरीन…….. http://sadhanathakur.jagranjunction.com/2011/12/21/%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%88/

    December 22, 2011

    साधना जी सादर नमस्कार !आपको इस ग़ज़ल के कुछ शेर पसंद आए …मुझे भी अच्छा लगा । आप लोगों की दाद मिलती है तो लिखने का जोश और बढ़ जाता है ….आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !!साभार ……

minujha के द्वारा
December 21, 2011

डॉ सूर्या जी आपके अश्कों ने भले गाल ना भिगोए हो, आपको  बधाई का पात्र जरुर बना दिया है……

    December 22, 2011

    मीनू जी नमस्कार !आपकी बधाई मिली बहुत अच्छा लगा …आप जैसे क़द्रदानों के नाते ही लिखने का हौसला मिलता है आप अपना स्नेह बनाए रखें ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!!

utpal के द्वारा
December 21, 2011

डॉ साहब आपके ग़ज़लों को पहली दफा पढ़ा ! ग़ज़लों के ज़मीन की रवानी के क्या कहनें हैं ! अच्छी लगीं आपकी ग़ज़लें ! कुछ शेरों में थोड़ा मस्क और हो जाये तो क्या बात हो ! दुआओं में याद रखनें के लिए उत्पल http://utpal.jagranjunction.com

    December 22, 2011

    उत्पल जी नमस्कार !आपका मंच पर हार्दिक स्वागत है ! आपको ग़ज़ल पसंद आई और आपकी दाद मिली बहुत अच्छा लगा। आपकी बात बिलकुल सच है अभी ग़ज़ल मे काफी काम बाक़ी है….मास्क की जरूरत है ऐसा मुझे भी लगता है….आपकी प्रथम प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! स्नेह बनाए रखें !!

Abdul Rashid के द्वारा
December 21, 2011

मज़बूरियों थी ज़िंदगी भर साथ में मगर, रिश्तों को बोझ समझ के ढोया कभी नहीं॥ वाह वाह ********************************* आदरणीय सूरज जी नमस्कार एक चिकित्सक के दिल की आवाज है या ………….. शिद्दत से लिखी रचना के लिए बधाई सप्रेम अब्दुल रशीद

    December 22, 2011

    रशीद भाई नमस्कार !इस ग़ज़ल पर आपकी नज़रे इनायत हुई और आपकी वाह मिली बहुत अच्छा लगा । आपका बहुत बहुत शुक्रिया !!


topic of the week



latest from jagran