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क्या हुआ है मुझे आजकल ये, क्यूँ जमीं पर उतरता नहीं हूँ

Posted On: 18 Oct, 2011 में

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क्या हुआ है मुझे आजकल ये, क्यूँ जमीं पर उतरता नहीं हूँ॥

बादलों सा फिरूँ आसमां मे, क्यूँ कहीं पर ठहरता नहीं हूँ॥

उसको लगता था जी न सकूँगा, उसके बिन भी मैं रह न सकूँगा॥

अब जहां पे ठिकाना है उसका, उस गली से गुजरता नहीं हूँ॥

कोई नेता हो चाहे मिनिस्टर, कोई मुंसिफ़ हो चाहे कमिश्नर,

जो मुझे भूल जाते है अक्सर, मैं उन्हे याद करता नहीं हूँ ॥

चाहे कितना भी मुझको सता ले, और जी भर के मुझको रुला ले,

पत्थरों की तरह हो गया हूँ, टूट कर अब बिखरता नहीं हूँ॥

बज़्म मे कल हमारी वो आया, जाम नज़रों से कुछ यूं पिलाया,

बेखुदी छाई अब तक उसी की, उस नशे से उबरता नहीं हूँ॥

छोड़ कर तू गया था जहां पे, आज भी मैं खड़ा हूँ वहीं पे,

कह दिया जान दे दी तो दे दी, मैं जुबां से मुकरता नहीं हूँ॥

अपनों ने ही मुझे है हराया, गैर तो हर वक़्त मात खाया,

खौफ़ खाता हूँ अपनों से “सूरज”, ग़ैर से मै तो डरता नहीं हूँ॥

डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Satch के द्वारा
July 11, 2016

Hi Amy….did you start with the honey bear…if not please start with that. I posted regarding the 3 levels of the honey bear. Continue with the pre-feeding exee#ises&c8230;esprcially the first level of the chew…chewing helps the tongue to retract. How old is she? What is she eating…and how well is she chewing…are you doing the chewing hierarchy? Happy Holidays!Kim

Abdul Rashid के द्वारा
May 24, 2015

नमस्कार सूरज जी  गैरो से तो मैं डरता नहीं. बहुत खूब

वाहिद काशीवासी के द्वारा
October 19, 2011

खौफ़ खाता हूँ अपनों से “सूरज”, ग़ैर से मै तो डरता नहीं हूँ।। आपकी यह पंक्ति वास्तव में दिल छू गई। चलिए कुछ देर से ही सही मगर एक बहुत ही अच्छे सृजक से रूबरू होने का मौक़ा मिला। आभार,

    October 19, 2011

    वाहिद साहब !ये मेरी खुशनसीबी है जो आप जैसा क़द्रदान इसे परख रहा है। आपका आशीर्वाद और स्नेह हमेश ऐसे ही बरसता रहे !!आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

akraktale के द्वारा
October 19, 2011

बाली जी नमस्कार, बहुत ही खूब गजल है.एक एक पंकित दिल को छू लेने वाली है. कोई नेता हो चाहे मिनिस्टर, कोई मुंसिफ़ हो चाहे कमिश्नर, जो मुझे भूल जाते है अक्सर, मैं उन्हे याद करता नहीं हूँ ॥ सुन्दर रचना के लिए बधाई!

    October 19, 2011

    नमस्कार जी ! हौसला बढ़ाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद और आपको रचना अच्छी लगी मेरा प्रयाश सार्थक हुआ। भविष्य मे भी आपका आशीर्वाद मिलता रहे ऐसी इच्छा है !!

राही अंजान के द्वारा
October 18, 2011

डॉ सूरज जी , बहुत खूबसूरत अल्फ़ाज़…..दिल को छू लिया ! हार्दिक आभार !! :)

    October 19, 2011

    प्रिय संदीप जी !आपके आशीर्वचन एवं बधाई के लिए धन्यवाद । आपका प्यार और स्नेह ऐसे ही मिलता रहे ॥

roshni के द्वारा
October 18, 2011

डॉ सूरज जी बहुत अच्छी कविता लिखी आपने


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