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दिल की बातें दिल से

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डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"


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अजनबी जबसे हमारी ज़िंदगानी हो गया।

Posted On: 20 Feb, 2012  
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उजाड़ सकता है घर वो बना नहीं सकता

Posted On: 18 Feb, 2012  
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घर समंदर के किनारे पे बनाता क्यूँ है?

Posted On: 3 Feb, 2012  
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कविता में

64 Comments

लिख रहा हूँ ख़त किसी के नाम से

Posted On: 20 Jan, 2012  
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44 Comments

शम्आ को छोड़ के अक्सर ये परवाने नहीं जाते

Posted On: 16 Jan, 2012  
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48 Comments

मोहब्बत आज भी तुमको बुलाती है अकेले में

Posted On: 7 Jan, 2012  
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71 Comments

हमारे गाँव में बचपन अभी भी मुस्कराता है

Posted On: 30 Dec, 2011  
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32 Comments

अश्क़ों से अपने गाल भिगोया कभी नहीं

Posted On: 21 Dec, 2011  
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73 Comments

उसके जलवों का ऐसा असर हो गया

Posted On: 14 Dec, 2011  
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Junction Forum कविता में

40 Comments

इश्क़ में हो गयी कुछ ऐसी बेबसी अपनी

Posted On: 6 Dec, 2011  
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58 Comments

दिल तोड़ के गया वो किसी अजनबी के साथ

Posted On: 21 Nov, 2011  
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Junction Forum कविता जनरल डब्बा में

32 Comments

घबरा गए अगर तो कहीं के न रहोगे

Posted On: 18 Nov, 2011  
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25 Comments

किसी से प्यार उसको भी जो हो जाता मज़ा आता

Posted On: 15 Nov, 2011  
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18 Comments

अदब से चिलमन उठा रही थी

Posted On: 12 Nov, 2011  
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23 Comments

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: Rajesh Tiwari

के द्वारा: संजय भारती

आपकी रचना से प्रेरणा लेकर कुछ लिखने का प्रयास किया है, कृपया आशीर्वाद दें- हम ही जिम्मेदार हैं जो ये हालत हो रही, आज मेरे देश की जो ये दुर्गत हो रही। अपराधियों को वोट दें फिर दोष दें नेताओं को, वोटरों की ये पुरानी मित्र आदत हो रही। संत  था वह इसलिये मारा गया आतंक से, डाकुओं की सच कहा कितनी हिफाजत हो रही। धर्म का चोला पहनकर और ईश्वर नाम से, देखियेगा देश में कितनी तिजारत हो रही। इंसाफ के मंदिर बने नेताओं की कठपुतलियाँ, कैद में संसद के शायद अब अदालत हो रही। कुर्सियां खाली करो अब आ रही जनता यहाँ, संसद को क्या मालुम नहीं बाहर बगावत हो रही। हर तरफ तो लूट भ्रष्टाचार औ आतंक है, दूसरी अब क्रांति की शायद जरुरत हो रही। आपकी बातों को मेरी पूर्णतः है सहमति, बदनाम सुरज जी यहाँ सचमुच सियासत हो रही।

के द्वारा: dineshaastik

आदरणीय डाक्टर साहिबान ..... सादर प्रणाम ! ये ढोंगी हैं, नहीं कोई है इनका धर्म मज़हब, दिखावे के लिए सारी इबादत5 हो रही है॥ आप शायद भूल गए लगते है की हमारा देश धर्म निरपेक्ष है और यहाँ पर साप्रदायिक सदभावना वाली सियासत होती है – इसलिए इबादत में खोट तो दिखाई देगा ही देगा सरस्वती माता जी के पूजन की हार्दिक मुबारकबाद हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: yogi saraswat

के द्वारा: D33P

के द्वारा: Dr.Shailesh Gaur

के द्वारा: Nikhil

के द्वारा: namaskar.jagranjunction.com

के द्वारा: viplove pandey

के द्वारा: Rajni Bagish

के द्वारा: rita singh 'sarjana'

के द्वारा: Piyush Raghav

राजकमल भाई नमस्कार ! आपकी बातों से मैं शत प्रतिशत सहमत हूँ और ये भी जानता हूँ कि आपका इरादा गलत नहीं होता है। रही बात भावों को खुला छोड़ने पकड़ने कि ये अपने अपने तरीके होते हैं और अपनी अपनी विधाएँ भी.......कोई प्रेमचंद कि तरह बिनाबंधन के लिखता है और कोई सूर तुलसी कबीर कि तरह बंधन मे ...... हम दोनों मिस्त्री हैं बस अंतर इतना है कि आप ट्रक के और हम ट्रान्जिस्टर के। न तो मैं आप कि ट्रक ठीक कर पाऊँगा और न आप मेरा ट्रान्जिस्टर ,,,,हमारा इरादा भले ही ट्रक या ट्रान्जिस्टर ठीक करने का नेक हो लेकिन बिना जानकारी के हम उसे और बिगाड़ देते हैं,,,,कोई बात नहीं आप बिलकुल सीरिअस न हों...आपकी अपनी स्टाइल बनाए रखे.....बहुत बहुत धन्यवाद !!

के द्वारा: Abdul Rashid

आदरणीय डाक्टर साहिब ..... सादर अभिवादन ! आपकी बाते सही है इनमे कुछ भी तो गलत नहीं है ..... लेकिन मैं नए ब्लागरो का उत्साह नहीं गिराता भले ही इसके लिए मुझे झूठ ही क्यों न कहना पड़े ..... यहाँ पर नए होने का मतलब हमेशा ही यह नहीं की वोह ब्लागिंग के क्षेत्र में भी नया ही है .... फिर भी किसी से भी पहली बार मिलना और नकारात्मक समान ही ठीक -२ प्रतिकिर्या देना भी उचित नहीं कहा जा सकता ..... इसी दुविधा में यह सब कुछ हो गया ..... वैसे जो होता है अच्छे के लिए ही होता है ..... मैं पिछले कई दिनों से आपकी किसी पोस्ट पर प्रतिकिर्या देना चाह रहा था लेकिन जब आज आपके ब्लॉग पर आया तो आपकी यह रचना शायद मुझको इसलिए नहीं इतना दिल के करीब लगी क्योंकि दूसरे ब्लागरो से आपकी तारीफ सुन कर आपसे बहुत ही ज्यादा अपेक्षाए रखी हुई है मैंने..... आप इसी प्रकार अपना बेस्ट हमे देते रहे और इस मंच की सेवा करते रहे .... मेरी तरफ से शुभकामनाये और मुबारकबाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma

राजकमल जी ! आपका ब्लॉग पर स्वागत है आपकी प्रथम प्रतिक्रिया पर आपको हार्दिक धन्यवाद ! क्षमा चाहूँगा की मेरा अपना मानना है की मंच पर नए होने का अच्छा लिखने से कोई ताल्लुक नहीं है है...कोई रचना अच्छी इसलिए बनती है उसमे जान से मेहनत की जाये और उस विधा को बारीकी से समझा जाये और पिछले कई सालों से साहित्य की दुनिया का अनुभव और आप जैसे चाहने वालों का प्यार भी है ,जो दिल की बातों को दिल के करीब पहुंचा देता है। रही बात आप ने (धोखा) शब्द पर फोकस किया है तो मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा की उर्दू साहित्य मे धोखा कोई शब्द नहीं होता है.... वास्तव मे सही शब्द "धोका"(DHOKA) है जिसे लोग हिन्दी नाते अपभ्रंस के धोखा लिखते और पढ़ते हैं। आपका स्नेह और प्रतिक्रिया मिलती रहेगी ऐसी आप से उम्मीद है।
आदरणीय सूरज जी, सादर प्रणाम ! अब अगर यूं कहूँ कि रचना अच्छी लगी या पढ़कर मज़ा आया या फिर वाह ! बहुत खूब सूरज जी.......तो ये सब महज़ एक औपचारिकता लगने लग गया है मुझे, लेकिन और कहूँ भी क्या !! ;) हर बार कुछ अलग शब्द ढूँढने की कोशिश करता हूँ लेकिन मिलते ही नहीं.....!! :) लेकिन ये बात हर बार......और इस बार भी कहता हूँ कि आप तख़ल्लुस के इस्तेमाल में रचना की आत्मा डाल देते हो । . फिर दो शब्द अपनी ओर से.....प्रयास कर रहा हूँ.....कृप्या धृष्टता माफ कीजिएगा.....!! . जीतना भी उसके बिना न शामिल हो मेरी हस्ती में, समझौता कर लिया अब तो मैंने शिक़स्तगी के साथ ॥ काश वो आए तो, ज़िंदगी ज़िंदगी सी लगे शायद, कमबख़्त रम-सी गयी है आजकल मुझमें बेखुदी के साथ ॥ . बहुत बहुत आभार.....हार्दिक बधाई आपको !! :)

के द्वारा: Priya Saxena

के द्वारा: rudranath tripathi

के द्वारा: Abdul Rashid

के द्वारा: shivangi




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